कैसे मैं अपने ” गे ( नामर्द ) पति को स्ट्रेट ( मर्द ) में बदल दिया ?

शादी से पहले मेरा भी एक सपना था॥ लेकिन शादी होते ही .. ?

शादी जो हर इंसान का सपना होती है।मेरी भी हुई।मैं पायल 2 भाइयों की इकलौती बहन, आज के ज़माने की लड़की पढ़ी लिखी संस्कारी। परिवार वालों ने एक लड़के को मेरे लिए चुना, रोहित उम्र 30 साल एक शानदार कम्पनी मैं जॉब, अच्छी खासी सेलरी। दिखने मैं आकर्षक, मृदुभाषी, और क्या चाहिए जीवन में। तुरंत शादी के लिए हां कर दी। शादी से पहले कुछ बातेँ फोन पर हुई,

कुछ कॉफी शॉप पर।रोहित को ज्यादा बोलने की आदत नहीं थी। मेरी सहेलियाँ मुझे छेड़ते हुए कहती “अच्छा है वो कम बोलता है। कम से कम तेरी सुना तो करेगा।आख़िर शादी के बाद वो रात आयी जिस रात को मैं अपना सब कुछ रोहित को सौंप देने वाली थी।जिसे मैंने सारे ज़माने से बचा कर रखा था॥

अपने जीवन साथी के लिए, अपना कौमार्य। अपने रूप को मैं पिछले 7 दिन से सँवार रही थी। दादी नानी के नुस्खों से लेकर आज के ज़माने का मेकअप तक. मैंने अपने रूप को आईने में देखा तो खुद ही शर्मा गई।

स्टोरी पिन छवि

“आइए रोहित बाबु आज आपकी खैर नहीं” मैं मन ही मन कह रही थी। दरवाजा खुला रोहित अंदर आया और बेड पर मेरे पास बैठ गया। अब वो होने वाला था जिसे मैंने मोबाइल मैं पोर्न मैं देखा था, और अपनी सहेलियों से सुना था।
शादी सिर्फ तन का मिलन नहीं मन का मिलन होता है, ये बात मेरे दिमाग में बिठा दी गई थी।

लेकिन तन के मिलन के बगैर मन का मिलन कैसे हो सकता है। मैं दहकते जिस्म के साथ सुहाग सेज पर रोहित के अगले स्टेप का इंतजार कर रही थी।खाना खा लिया आपने” रोहित ने पूछा हाँ” मैंने धीरे से कहा मन ही मन में मुझे हंसी भी आयी मेहंदी बहुत अच्छी लगी है।

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सुहागरात की सारी सपना डह गई॥ क्योंकि वो तो एक  .. ?

मैंने अपने दोनों हाथ आगे कर दिए, उसने हाथो को धीरे से पकड़ा और मेहंदी की तारीफ मैं कुछ शब्द कहे और सो गया।मेरे अन्दर कहीं कोई लावा बह रहा था। सुहागरात की कल्पना कर कर के मैं सिहर रही थी लेकिन सुहागरात की सारी कल्पनायें डह
गई। शायद रोहित थका हुआ होगा मैंने अपने मन को समझाया..

लेकिन आगे कई रात तक ये सिलसिला चला, रोहित आता कुछ फॉर्मल बातेँ होती और वो सो जाता।
आखिर एक दिन मैंने शर्म को चोला उतार फेंका, रोहित के बिस्तर पर आने के बाद मैंने रोहित को जकड़ लिया और अपने होंटों से रोहित के निचले होंठ को चुभलाते हुए उसके सीने को रगड़ने लगी, अचानक हुए इस अप्रत्याशित हमले से रोहित घबरा कर उठने की मशक्कत करने लगा। मैंने रोहित के कान की लो चुभलाते हुए कहा आखिर हम पति पत्नी हैं रोहित।

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नहीं वो बात नहीं है” रोहित बोला ।अचानक मुझे अह्सास हुआ, की मेरे पेट पर कुछ चुभ रहा है। मैं मन ही मन मुस्काई की चलो रोहित बाबु नामर्द तो नहीं है ।अब विचारणीय प्रश्न था कि आखिर रोहित मुझसे इतनी दूर क्यु है.
लगता है अब हमे खुल कर बात कर लेना चाहिए। रोहित ने कहा

मैं भी यही चाहती हूं, की आखिर पता तो चले कमी किसमें है। कहकर मैं अपनी नायटी समेटती हुई हॉल में आ गई। हॉल में रोहित और मैं आमने सामने बैठे हुए थे।देखो मैं जानता हूं कि हम पति पत्नि हैं और हम दोनों की कुछ जिस्मानी जरूरतें हैं।और तुम्हारी उस जरूरत को मैं पूरा नहीं कर रहा हूं, इसका मतलब ये तो नहीं कि मैं तुम्हें प्यार नहीं करता” रोहित ने कहा ,हम पति पत्नी हैं जवान हैं।  भी रोहित के अंदाज मैं उसे जवाब दिया।

 

देखो पायल मैं ” गे हूँ॥ वो सब ..

सेक्स की अपनी एक जरूरत होती, जो तुम पूरा नहीं कर रहे हों अगर तुम प्यार करते हो तो ये जरूरत भी पूरी करो” मैंने देखो पायल मैं गे हूं” रोहित बोला ।
मुझे औरत के नर्म जिस्म की जगह मर्दों के कठोर जिस्म की चाहत होती है।

रोहित के मुह से ये सुनकर मुझे ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ
अब मेरे सामने चुनौती थी कि कैसे एक गे को औरत के जिस्म से खेलने का शौक लगाया जाए ।

और इस चुनौती को पूरा करने के लिए मेरे पास कई हथियार थे । आखिर मैं आजकल के जमाने की लड़की हूं, इतनी जल्दी हार कैसे मान सकती हूं। रोहित की चाहत औरत का नर्म जिस्म नहीं मर्द का बदन है। ये सुनकर भी मुझे ज्यादा आश्चर्य इसलिए नहीं हुआ, की कालेज के टाईम मैं हमारे एक प्रोफेसर जो बड़े स्मार्ट से थे।

और लड़किया उनकी दीवानी थी। लेकिन प्रोफेसर साहब ल़डकियों को ज्यादा भाव नहीं देते थे. वहीं अगर कोई लड़का प्रोफेसर साहब से मदद मांगता तो वे उस लड़के की मदद को तुरंत तैय्यार हो जाते थे। बाद में पता चला की प्रोफेसर साहब गे थे। प्रोफेसर साहब का गे होना उनकी निजी चाहत थी, लेकिन प्रोफेसर साहब इंटेलिजेंट थे।

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इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता था। रोहित अगर गे था तो था। लेकिन अब मेरा पति था. अब मैंने भी कमर कस ली थी, की रोहित को स्ट्रेट बना कर दम लूँगी। मैंने रोहित से कहा “मुझे अकेले सोने मैं डर लगता है,। इसलिए मेरे साथ बेड पर ही सोया करो भले ही हम कुछ ना करे लेकिन साथ मैं सो तो सकते हैं। रोहित मेरी बात मान कर साथ सोने लगा।

सोते वक्त कभी मेरी एक टांग रोहित के ऊपर आ जाती। कभी रोहित की टांग मेरे ऊपर, कभी रोहित मुझ पर हाथ रख लेता। कभी मैं रोहित पर इसी तरह सुबह हो जाती। अब मैं और रोहित एक दूसरे से काफी खुल गए थे। मैं रोहित से अपनी ब्रा का हुक लगवा लेती तो रोहित भी मेरे सामने अपने कपड़े चेंज कर लेता।

एक दिन मैंने रोहित से पूछा कि तुम जब अपने पार्टनर के साथ सेक्स करते हो। तो ऐक्टिव होते हो या पेसिव क्या मतलब है तुम्हारा” रोहित ने पूछा अरे यार तुम अपने पार्टनर के नीचे होते हो या उपर” मैंने कहा मैं ज्यादातर पार्टनर के ऊपर रहना पसंद करता हूं। लेकिन अगर किसी पार्टनर की इच्छा मेरे ऊपर आने की होती है। तो उसे अंदर आने देता हूं” रोहित ने कहा।

 

मुझे भी अब चुनौती थी  की एक गे को ..

रोहित की इस स्वीकारोक्ति से मुझे आगे की रणनीति सोचना थी।
एक दिन हम किसी पार्टी से लौट कर आए और कपड़े चेंज करने लगे। मैं अपनी रेड ब्रा पैण्टी पहन कर रोहित के पास आयी और बोली कि ब्रा का हुक लगा दो, रोहित उस वक्त सिर्फ शॉर्ट पहने खड़ा था।जरा ब्रा का हुक खोल दीजिए”मैंने कहा ।
रोहित ने जैसे ही ब्रा का हुक खोला। मैं रोहित की तरफ घूम गई, मेरी ब्रा नीचे गिर गई थी,

रोहित की नजरे मेरे गोरे जिस्म पर फिसल रही थी। आज पता नहीं क्यु मेरे सीने में दर्द सा हो रहा है। आप प्लीज़ थोड़ा बाम लगा देंगे” कहकर मैं बिस्तर पर लेट गई।
रोहित किंकर्तव्यविमूढ़ की तरह खड़ा रहा।अब लगा भी दीजिए, ठीक है। आपको कुछ नहीं करना है लेकिन बाम तो लगा सकते हैं ना, आखिर हम पति पत्नि हैं।

एक दूसरे के सुख दुख में काम आना हमारा फर्ज है” मैंने कहा ।
मेरी ये बात सुनकर रोहित मेरे पास बैठ गया और सीने के बीच मैं बाम लगाने लगा।ऊ.. म.. यहां.. थोड़ा साईड मैं कहकर मैंने रोहित का हाथ पकड़ कर अपने सीने पर फिराने लगी।रोहित ने धीरे से अपना हाथ हटा लिया, मैंने अपना हाथ रोहित की जांघ पर रखा और बोली “मुझे पता है की आप गे हो।

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और ये कोई बड़ी प्रॉब्लम नहीं, आपके सुख के लिए मैं इतना तो कर ही रही हूँ कि आपके किसी काम मैं मैं डिस्टर्ब ना करू, लेकिन आप भी तो मेरे लिए कुछ कीजिए, मुझे आप सम्पूर्ण सुख नहीं तो कुछ सुख तो प्रदान कर ही सकते हैं।लेकिन कैसे” रोहित ने कहा अपने हाथ और उनकी उँगलियों का ईस्तेमाल तो कर सकते हो ना”मैंने रोहित को आंख मारते हुए कहा।

रोहित के सख्त हाथ के घोड़े मेरे शरीर पर दौड़ने लगे, रोहित की उंगलिया मेरे शरीर के अंदर समा गई।थोड़ी देर बाद मैं बिस्तर पर पेट के बल लेट गई। ये भी मेरी प्लानिंग का हिस्सा था। मैं रोहित को वह दिखाना चाहती थी। जिसकी तलाश में रोहित घर से बाहर जाता था। अचानक मैं उठ कर बैठ गयी और बोली थैंक्स कम से आप ने मेरे लिए इतना तो किया।

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रोहित बड़े ग़ौर से मुझे देख रहा था।मैं जानती थी कि मेरी प्लानिंग सक्सेस हो गई है। जो मैं रोहित को दिखाना चाहती थी उसने देख लिया है।चलिए अब आप लेट जाइए। मैं आपकी मालिश कर देती हूं।कहकर मैंने रोहित को धक्का दिया और तेल ले कर उसकी जांघों पर मलने लगी।

ये शॉर्ट्स उतार देंगे तो अच्छे से मालिश कर पाऊँगी” कह कर मैंने रोहित का शॉर्ट्स उतार फेंका। अब देखिए मेरे हाथों का कमाल” मैंने कहा ।कुछ देर बाद रोहित बिस्तर पर पड़ा हांफ रहा था। और मैं मन ही मन मुस्कुरा रही थी।इस घटना के बाद रोहित के व्यवहार में आश्चर्यजनक परिवर्तन आया।ये मेरी सफ़लता की और बढ़ते हुआ कदम थे।

एक दिन रोहित के पैर मैं मोच आ गई, डॉक्टर ने 10 दिन का बेड रेस्ट बताया। मेरे लिए ये 10 दिन बहुत अहम थे। मैंने अपनी पूरी प्लानिंग कर रखी थी। शुरू के 2 दिन मैंने रोहित से नॉर्मल रही उसे सहारा देकर टायलेट ले जाती उसके पैर की मालिश करती उसका ख्याल रखती रोहित भी मुझसे खूब हंसी मजाक करता। हम दोनों के दिन खूब अच्छे से बीत रहे थे।

 

आज मैं अपने “गे पति  को स्ट्रेट मैं बदल कर दम लूँगी ॥ क्योंकि.. ?

एक दिन मैंने रात को पोर्न मूवी लगायी। और नायटी पहन कर देखने लगी, रोहित मेरे पास ही लेटा हुआ था। कुछ देर बाद मैं रोहित के सीने पर सर रख कर लेट गई। कुछ देर बाद सरकते सरकते मैं रोहित के पेट पर आ गई, और रोहित के उभार को देख कर मेरी आँखों में चमक आ गई।मैने रहित से कहा “लाइये मैं आपकी मालिश कर देती हूं। नहीं नहीं मैं ठीक हूं, मुझे मालिश की जरूरत नहीं

 

” रोहित ने कहा। अरे तो मालिश के बदले में आप भी मेरी मालिश कर देना स्पेशल वाली” मैंने शरारत से कहा ।
मैंने रोहित के कपड़े उसके शरीर से अलग किए। और धीरे धीरे मालिश करने लगी । और रोहित का जिस्म अकडने लगा। मुझे भी जैसे इसी पल का इंतजार था।

 

 

तुम मेरे पार्टनर जैसा नहीं हो ॥ तुम्हें कैसे ?

मैंने रोहित से कहा ” आज तुम ये सोचो की मैं तुम्हारा गे पार्टनर हूं और तुम मुझे उसी तरह प्यार करो। लेकिन तुम एक औरत हो तुम्हें गे कैसे समझ सकता हूँ और तुम्हारे शरीर की बनावट भी वैसी नहीं है।

 

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“बिल्कुल है। कहकर मैं पलट गई।अब तुम जैसा अपने पार्टनर को महसूस करते हो, मुझे भी करो, तुम अंदर आने की कोशिश करो। मैं कहते हुए अपनी कुहनियों के बल झुक गई। अचानक मुझे महसूस हुआ कि रोहित अंदर आने की कोशिश कर रहा है। अंततः मैं अपने मकसद में कामयाब हुई।
मैंने सफर का 70% पड़ाव पार कर लिया है अब हमे अपने बच्चे की प्लानिंग करना है। उसके लिए रोहित का सामने से आना जरूरी है. एक दिन मैं उसे सामने से भी ले आऊंगी। आखिर मैं आज के जमाने की लड़की हूं हार नहीं सकती। इसी तरह रोहित के पांच दिन निकल गए।

 

अब वो इससे बहुत खुश था,,की बाहर तो ॥

इन पांच दिनों मैं मैंने रोहित को पीछे से अंदर आने दिया था। इस बात से रोहित खुश था। कि इस सुख के लिए उसे बाहर नहीं जाना पड़ा। लेकिन बच्चे के लिए रोहित का सामने वाला दरबाजा तोड़ कर अंदर आना जरूरी था।और यही रोहित के लिए जरूरी भी था। वह इस स्वाद को कभी भुला नहीं पाए और बार बार इस स्वाद को पाने के लिए मेरे दरवाजे पर आए। इस तरह मालिश का सिलसिला चलता रहा।

कभी मैं रोहित की मालिश कर देती और कभी रोहित मेरी. दसवें दिन रोहित का प्लास्टर काट दिया गया। उस दिन हम दोनों डिनर करने बाहर गए।

डिनर के दोरान रोहित ने अपने लिए व्हिस्की और मेरे लिए वोडका मंगवाई, जब हम घर पहुचें नशे में हम दोनों बहक रहे थे। बैडरूम मैं पहुच कर मैंने अपनी ब्लैक शीफ़ोन की साड़ी उतार फेंकी और अपनी ब्लेक ब्रा और पेंट्री मैं बिस्तर पर लेट गई। हम दोनों में चुहलबाजी शुरू हो गई।

कभी वो हाथ फेरता कभी मैं हाथ फेरती, मैंने अपनी ब्रा उतार कर रोहित के मुह पर फेंक दी। कमरे की दूधिया रोशनी मैं मेरी छातियों चमक रही थीं। रोहित के शार्टस का उभार चुगली कर रहा था। कि रोहित फिर से पीछे के रास्ते पर चलना चाहता है। लेकिन मैं इतने नशे में नहीं थी मैं नशे मैं होने का नाटक कर रही थी। क्युकी मेरा मकसद सामने का दरवाजा खोल कर बच्चे की प्लानिंग करना था। रोहित के हाथ बहक रहे थे।

वो मुझे करवट दिला कर मेरे पीछे अपने आप को स्पर्श सुख पहुचा रहा था।

उसके दिल में जो था वह मैं बखूबी समझ रही थी । रोहित का सख्त उभार मेरी कमर पर महसूस हो रहा था। मैंने रोहित का हाथ पकड़ कर अपने आगे रखा। और कहा आज मुझे तुम्हारी उँगलियों की मसाज की बहुत जरूरत है, रोहित का हाथ गतिमान हो उठा मैंने भी रोहित के उभार को पकड कर मसलना शुरू कर दिया।

हम दोनों एक दूसरे को अपने अपने हाथो से मसाज या मसाज के बहाने एक दूसरे के शरीर में आग लगाने लगे।रोहित मुझे पेट के बल लिटाने की कोशिश करने लगा। मैंने रोहित से कहा कि मैं सीधी ही लेटती हूं यह कह कर मैं पीठ के बल लेट गई। और रोहित सामने की तरफ आ गया। मेरे घुटने मुड़े हुए थे। रोहित मेरे पीछे कुछ टटोल रहा था। जिससे वह अपने जिस्म के हिस्से को वहाँ समाहित कर सके लेकिन आज मेरा मकसद कुछ और था।

 

जब सब्र का बांध टूटने लगा॥ तो मैं,,

मैंने रोहित से कहा रुको और मैं उठ कर अपने होंठ रोहित के सख्त जिस्म के पास ले आयी और अपनी जीभ का भली भांति प्रयोग करने लगी। रोहित धीरे धीरे अकड़ने लगा जब मुझे लगा की रोहित के सब्र का बाँध जो धीरे धीरे टूट रहा है। अब कभी भी लावा फुट सजता है । मैं तुरंत लेटी और रोहित का जिस्म मैं ने अपने सामने के दरवाजे पर टिका लिया।

रोहित पीछे हट कर मेरे पीछे के दरवाजे पर आना चाहता था। लेकिन मैंने अपने पैरों और हाथो की गिरफ्त मैं उसे जकड़ रखा था। रोहित का जिस्म मेरे अध खुले सामने के दरवाजे पर था। मैंने कहा रोहित come on आज एक शॉट सामने वाली पीछ पर खेल ही लो रोहित ने कहा नहीं प्लीज़ पीछे मैंने कहा नहीं यही पर रोहित ने कहा देखो मेरी हालत खराब है। मुझे बैक door नॉक करना है । मैंने कहा रोहित come on शॉट लगाओ ।

और मैंने अपनी कमर उठा कर रोहित का जिस्म अपने अंदर लेने की कोशिश की रोहित का आधा जिस्म मेरे अन्दर समा गया। मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे अंदर किसी ने सख्त और गरम चीज डाल दी हो, और मेरा जन्नत का रास्ता खुल गया हो। अब रोहित को भी उस गर्ल चीज मैं जाकर भी मजा आने लगा। अब रोहित अपने जिस्म को बाहर नहीं खींच रहा था। और मैं उस गर्म अह्सास को अपने और अंदर समाने की कोशिश कर रही थी।

मेरे दोनों हाथ रोहित की कमर को जकड़े हुए थे। ताकि रोहित निकल ना जाए । और मैं उसे नीचे की तरफ दबा रही थी और फिर रोहित पूरा मुझमे समा गया मेरे जिस्म ने थरथरा के पसीना छोड़ दिया। रोहित को भी यह पहला अह्सास अच्छा लगने लगा। कुछ सेकेंड शांत रहने के बाद रोहित थोड़ा सा बाहर आया। और फिर अंदर समा गया।

अब इस बाहर निकलने और समाने ने तूफान का रूप धारण कर लिया और मेरा दर्द मजे मैं बदल गया ।आज एक शॉट सामने वाली पीछ पर खेल ही लो रोहित ने कहा नहीं प्लीज़ पीछे मैंने कहा नहीं यही पर रोहित ने कहा देखो मेरी हालत खराब है। मुझे बैक door नॉक करना है । मैंने कहा रोहित come on शॉट लगाओ ।

आखिर जीत मेरी हुई ॥ की नामर्द पति को .. ?

और मैंने अपनी कमर उठा कर रोहित का जिस्म अपने अंदर लेने की कोशिश की रोहित का आधा जिस्म मेरे अन्दर समा गया। मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे अंदर किसी ने सख्त और गरम चीज डाल दी हो, और मेरा जन्नत का रास्ता खुल गया हो। अब रोहित को भी उस गर्ल चीज मैं जाकर भी मजा आने लगा। अब रोहित अपने जिस्म को बाहर नहीं खींच रहा था।

और मैं उस गर्म अह्सास को अपने और अंदर समाने की कोशिश कर रही थी। मेरे दोनों हाथ रोहित की कमर को जकड़े हुए थे। ताकि रोहित निकल ना जाए । और मैं उसे नीचे की तरफ दबा रही थी और फिर रोहित पूरा मुझमे समा गया मेरे जिस्म ने थरथरा के पसीना छोड़ दिया।

रोहित को भी यह पहला अह्सास अच्छा लगने लगा। कुछ सेकेंड शांत रहने के बाद रोहित थोड़ा सा बाहर आया। और फिर अंदर समा गया। अब इस बाहर निकलने और समाने ने तूफान का रूप धारण कर लिया और मेरा दर्द मजे में  बदल गया । जिस दिन के लिए मैंने प्लानिंग की थी।वह आज सक्सेस हो गई। कुछ देर बाद तूफान के साथ बाढ़ आ गई ,और तूफान शांत हो गया। रोहित मेरे ऊपर लेता हुआ लंबी सांसे भर रहा था। मैंने रोहित को अपने ऊपर से हटाया नीचे देखा। तो चादर मैं खून के धब्बे लगे हुए थे। ये मेरे प्यार की निशानी थे।

अब हम दोनों सुखी जीवन बिता रहे हैं। आखिर जीत मेरी हुई मैंने एक गे को स्ट्रेट मैं बदल दिया था। ।तो पाठकों ये मेरा कहानी आपको कैसा लगा। आप कमेन्ट जरूर करे। और आप मुझे follow भी कर सकते  हैं। धन्यवाद दोस्तों 👋👋👋👋

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