मैं अब बर्दाश्त नहीं करूंगी॥ तुम रोज -रोज… ?

नीरज जी आज नहीं ।आज मै बहुत थक गई हूं।क्या रोशनी तुम्हारा तो रोज़ का नाटक है आज सिर दर्द आज काम बहुत है। आज कुछ और।

क्या है ये सब ?मुझे कुछ नहीं पता तुरंत इधर आओ ।

लेकिन नीरज जी मै सच में बहुत थक गई हूं।  इतने सारे मेहमान आए थे चीकू की बर्थडे पार्टी में । जीजी ने सारा काम मुझे सौंप दिया किसी खाना बनाने वाली को भी नहीं बुलाया ।

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मै सुबह से किचन में लगी थी। रोशनी एक सांस में ही सब बोल गई। चट्टाक से एक चांटा रोशनी के गाल पर पड़ा ।

बहुत बोलने लगी है। चल इधर  आ … नीरज ने रोशनी को बिस्तर पर गिरा दिया।

 

और तब तक उसे मसलता रहा जब तक वह थक ना गया ।और फिर आराम से सो गया।

रोशनी नीरज का ऐसा बर्ताव देखकर बहुत सहम गई अभी 2 ही महीने तो हुए थे उनकी शादी को।नीरज अपने 5  भाइयों में सबसे छोटा था और सबका लाडला था ।

सास, ससुर, जेठ,जेठानियों, बच्चो से भरे घर में आई थी वह । घर कहा था पूरा कस्बा ही था।

नीरज एक दुकान में मुंशी का काम करता था। देखने में नीरज ठीक ठाक औसत था।रोशनी अपने मा बाप की इकलौती संतान थी ।

शुरू से ही मस्त । ना पढ़ने में मन लगता और ना घर के काम में

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कभी घर का काम करने कि जरूरत ही नहीं पड़ी।

रोशनी के पापा हमेशा रोशनी से कहते थे कि रोशनी कुछ काम करा कर पाता नहीं कैसा ससुराल मिले ।

पढ़ाई में ही मन लगा।

आज के समय में लड़कियों को आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है।

एक प्रोफेशनल डिग्री तो हाथ में होनी ही चाहिए । कल किसी ने नहीं देखा है। सारा दिन बस मोबाइल में ही लगी रहती हीTransparent Girl On Phone Png - Girl With Mobile Png, Png Download , Transparent Png Image - PNGitem

तुम्हारा जो कोर्स करने का मन हो करो मै सब करवा दूंगा ।पता नहीं बेटा कैसा ससुराल मिले कैसा पति हो ।अपने पैरों पर खड़ी रहोगी तो अच्छा ही होता है।

ऐसा कहते हुए विश्वनाथ जी के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आई।रोशनी कहती अरे पापा आप तो ऐसा कह रहे जैसे मेरी शादी किसी गाव में कर दोगे।

क्या हर समय मेरे पीछे पड़े रहते हैं ।

 

अरे आप तो हर समय मेरी गुड़िया के पीछे पड़े रहते हो मै तो उसके लिए राजकुमार लाऊंगी ।

राज करेगी राज अपने ससुराल में। नौकर चाकर की तो लाइन लगी रहेगी। रोशनी की मा रोशनी को प्यार करती हुई कहती।

अरे रोशनी कि मां भविष्य किसी ने नहीं देखा है। अरे आप शांत रहो रोशनी के पापारोज की यही कहानी थी।

पापा मम्मी आप लोग लड़ो। मैं तो कॉलेज जा रही हूं। रोशनी अपना बैग उठाती हुई हिरनी सी फुदकती हुई कमरे से बाहर चली गई ।

अरे रोशनी कि मां तुम तो मेरी हर बात ग़लत ही समझती हो मैं भी रोशनी का बाप हूं।   इकलौती बेटी है ।हमारी लेकिन भविष्य किसी ने नहीं देखा उसको आत्मनिर्भर बनाओ ।

अरे आप भी ना , हम लोगो का सब कुछ रोशनी का ही तो है। उसे किस बात की कमी ।

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अरे मीना मेरे कहने का मतलब था कि…

अब आप शांत हो जाइए चलिए मंदिर चलना है ।मीना रोशनी के पापा को बीच में टोकती हुई बोली।

देर हो रही है।जैसी आपकी आज्ञा मैडम जी । रोशनी के पापा मिस्टर विश्वनाथ सर झुकाकर मीना जी से बोले।वैसे भी मंदिर पहुंचने में एक घंटा लग जाएगा।

आपसे तो बातों में जीत ही नहीं सकता ।

रोशनी भी हमलोग के साथ चलती तो अच्छा रहता ।लेकिन आज कॉलेज में उसका प्रैक्टिकल है वो कॉलेज से सीधे मंदिर आ जाएगी।

मीना जी घर के दरवाजे बंद करते हुए विश्वनाथ जी से बोली।

आज रोशनी के मम्मी पापा की शादी की 25 वी सालगिरह कि पूजा थी शंकर जी के मंदिर में ।

मंदिर उनके घर से करीब 30  किलोमीटर दूर था। रोशनी को कॉलेज से ही मंदिर पहुंचना था।

क्युकी आज उसका बीए अंतिम वर्ष का फाइनल प्रैक्टिकल था।

बड़ी मुश्किल से इतनी ही पढ़ाई कर पा रही थी। क्युकी उसका मन ही नहीं लगता था पढ़ने में ।

सारा दिन बस फेसबुक, स्नैपचैट, इंस्टाग्राम, दोस्तो से बातें करना बस।

उसने ज़िन्दगी को कभी सीरियसली लिया ही नहीं । इकलौती होने की वजह से बचपन से ही हर मांग मुंह खोलने के पहले ही पूरी हो जाती ।

पापा जब भी पढ़ने को कहते तो कोई ना कोई बहाना बनाकर भाग जाती।

2 घंटे बाद रोशनी के कॉलेज में-रोशनी रोशनीकॉलेज का चपरासी प्रैक्टिकल रूम के बाहर आवाज़ दे रहा था ।

रोशनी अचानक चौंक गई की ये ऐसे क्यों बुला रहे है।

क्या हुआ? रोशनी ने घबराते हुए पूछा ?फोन आया है सिटी हॉस्पिटल से बात करो ।क्या।

रोशनी प्रिंसिपल रूम में भागती हुई पहुंची।

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हैलो हैलो उधर से आवाज़ आई ।आप तुरंत सिटी हॉस्पिटल आ जाइए आपके मम्मी पापा का एक्सिडेंट हो गया है।रोशनी वहीं गिर पड़ी।

तुरंत प्रिंसिपल ने उसे संभाला ।रोशनी बेटा फिक्र मत करो मै तुम्हारे साथ चलता हूं।रोशनी की आंखो के सामने अंधेरा छा रहा था ।

तभी वो हिम्मत करके खड़ी हुई और प्रिंसिपल सर के साथ हॉस्पिटल के लिए रवाना हुई।

 

 

कॉलेज से हॉस्पिटल तक का सफर मिलो लंबा लग रहा था पल भर में ये क्या हो गया ।

उसे अपने पापा के शब्द याद आ रहे थे ।

जो आज सुबह ही वो कह रहे थे कि भविष्य किसी ने नहीं देखा है। 20  मिनट बाद वो हॉस्पिटल में थी।

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डॉक्टर मै रोशनी अभी यहां से फोन आया था। मेरे मम्मी पापा कहा है। उसके हलक से शब्द नहीं निकाल रहे थे।

नर्स उसे आईसीयू में ले गई ।बहुत ही बुरा एक्सिडेंट हो गया था दोनों का। बुरा चेहरा ही बिगड़ गया था रोशनी के मा, पापा का उन्हें देखते ही रोशनी गश खाकर गिर पड़ी।

बड़ी मुश्किल से वहां के डॉक्टर्स ने उसको संभाला ।

रोशनी के देखते देखते ही उसके मा, पापा इस दुनिया से चले गए । ना कुछ कह पाए ना कुछ सुन पाए ।बस रोशनी पागलों की तरह चिल्लाए जा रही थी रोए जा रही थी।

आज तो उनकी 25 वी सालगिरह थी ये क्या हो गया। आज ही के दिन रोशनी के ननिहाल से सभी आ गए थे ।

अब यहां उसका कोई था ही नहीं इसलिए रोशनी को मुंबई से हमीरपुर जो कि यूपी में था। वहां अपने मामा मामी पास आना पड़ा।

ना तो रोशनी के दादा दादी थे। ना नाना नानी और अब मा पापा भी नहीं थे।शुरू के कुछ दिन तो मामी ने उसको अच्छे से रखा ।

लेकिन जब उन्हें लगा कि ये तो परमानेंट यही रहेगी क्युकी मुंबई का घर तो किराए का था। और वहां कोई था भी नहीं जिसके भरोसे रोशनी को छोडा जा सके।

तो उसको जल्दी ही वहां से भगाने का आइडिया सोचने लगी।रोशनी तो सारा दिन सिर्फ रोती ही रहती थी। उसका तो सब चला गया था ।

धीरे धीरे मामी उससे घर के खूब काम कराने लगी।

वो रोशनी जो एक गिलास पानी भी उठा के नहीं पीती थी आज पूरा खाना बनाने लगी थी।

धीरे धीरे 6  महीने बीत गए। रोशनी की पढ़ाई भी छूट गई।

जल्दी ही उसकी मामी ने अपने दूर के भाई से उसकी शादी तय कर दी।रोशनी के मामा ने मना भी किया लेकिन मामी ने उन्हें समझा दिया कि वो लोग बिना दहेज के शादी करने को तैयार है।

और वो लोग इतना रुपया कहा से लाएंगे ।अपने भी 2 बच्चे है उनका भी भविष्य देखना है।

रोशनी के मामा बहुत पढ़लिखे नहीं थे कि मुंबई जाकर रोशनी के पापा के ऑफिस से रुपए ला पाते या जो रुपए विश्वनाथ जी ने रोशनी कि शादी के लिए जोड़ कर रखे थे। उन्हें निकाल पाते।

रोशनी तो बिल्कुल शांत हो चुकी थी। उसका दिल , दिमाग सब ख़तम हो चुका था।मामी ने जैसा कहा उसने वैसा कर लिया।

रोशनी की कोई इच्छा नहीं थी। शादी करने की लेकिन बिना मा बाप की बच्ची सबको बोझ लगती है।

बिना दहेज दिए खूबसूरत, चंचल रोशनी नीरज के गले बांध दी गई।

 

नीरज देखने में तो सुन्दर था। लेकिन उसकी कमाई बहुत नहीं थी जिसकी वजह से घर में उसकी कोई इज्जत नहीं थी। सब भाभी उससे अपने काम निकलवाती रहती।

नीरज अपने काम की झुंझलाहट को रोशनी के ऊपर निकालता ।रोज रात को बिस्तर पर उसे रोशनी चाहिए। फूल जैसी रोशनी रोज मसली जाती ।

दिनभर घर के काम करती और रात में बिस्तर पर पति की सेवा ।

कभी नीरज ने रोशनी की इच्छा जानने कि कोशिश नहीं की उसे बस रोशनी अपनी प्यास बुझाने की मशीन लगती।

क्या ज़िन्दगी हो गई थी रोशनी की।

वो सब कुछ सह रही थी क्युकी उसके पास कोई रास्ता ही नहीं बचा था किस से अपने मन की बात कहे कोई भी तो उसका अपना नहीं था।

रोशनी ज़िंदा लाश बन गई थी।

3  महीने और गुजर गए नीरज या उसके घर वालो के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया था ।

उन्हें तो घर बैठे फुल टाइम नौकरानी मिल गई थी । जो कभी छुट्टी नहीं ले सकती ।

उसकी भाभियां तीस में बीस दिन मायके जाती लेकिन वह कहा जाएं । उसकी मामी कभी उसको बुलाती ही नहीं थी।

बिना दहेज शादी जो करवा दी थी उन्होंने।

 

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रोशनी ने इसे ही अपनी नियति मान लिया था।

उस घर में उसकी हैसियत सिर्फ काम वाली बाई की तरह ही थी। । छोटी से छोटी बात में नीरज उसे थप्पड़ मार देता।

आज भी नीरज ने उसे जोर का चांटा मारा था। क्युकी रोशनी ने ठंडे पानी की जगह नीरज को सादा पीने का पानी दे दिया था ।

रोशनी आज बहुत बिलख बिलख कर रोई ।

अब उसे अपने पापा की एक एक बात याद आ रही थी। कि भविष्य किसी ने नहीं देखा । पता नहीं कैसा घर और पति मिले

काश मै भी मा पापा के साथ ही चली जाती क्या नरक ज़िन्दगी हो गई है मेरी ।

पापा पापा लौट आओ आप जैसा कहोगे मै वैसा ही करूंगी। बहुत पढ़ाई करूंगी ।

पापा वापस आ जाओ ।मा अपनी प्यारी गुड़िया की हालत देखो क्या हो गया ये सब ।

मा मुझे बचा लो ।इस नरक से बाहर निकालो ।

आज रोशनी रोए जा रही थी उसकी ज़िन्दगी तबाह हो गई थी।

अचानक उसने अपने सामने एक चीटे को देखा जिसके एक पैर खराब था लेकिन वो दीवार पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था वो बार बार चढ़ता लेकिन बार-बार गिर जाता।

उसने हार नहीं मानी आखिरकार वो चढ़ ही गया ।

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रोशनी के दिमाग में उसको देखकर अपने पापा की बात याद आ गई

बेटा कभी ज़िन्दगी में हार नहीं मानना हमेशा आगे बढना ।

कोई भी परिस्थिति हो अपने दिमाग से काम लेना रास्ते मिल ही जाएंगे।

कभी रोशनी ने इन बातो को महत्व नहीं दिया लेकिन आज अपने पापा की कही एक एक बात उसे रास्ता दिखा रही थी ।

थैंक्यू पापा आपने मुझे रास्ता दिखा दिया है मेरे साथ हमेशा रहिएगा। उठ खड़ी हुई वह बहुत शांति थी आज उसके मन में उसे समझ आ गया कि उसे क्या करना है ।

तुरंत उसने मुंबई में अपनी बेस्ट फ्रेंड शीतल को फोन किया उससे सब बातें बता दी जो आज तक किसी से नहीं कही।

वहा से उसने अपने कॉलेज के प्रि सिपल सर का नंबर लिया ।जो कि उसके पापा के अच्छे मित्र थे। शीतल ने अर्जेंट मुंबई का टिकट बुक करा दिया जो सुबह 6 बजे का था । अभी रात के 1  बजे थे ।

मुंबई की ट्रेन कानपुर से थी ।

रोशनी को हमीरपुर से कानपुर पहुंचना था । पता नहीं कहा से उसके अंदर हिम्मत आ गई।

वह उठी मुंह हाथ धोया और किचन में चली गई। सबको खाना खिलाया किचन साफ किया खुद खाना खाया तब तक रात के 12  बज गए थे।

सबके सोते ही उसने बैग पैक करा कपड़े, रुपए रखे और बस स्टैंड कि तरफ चल दी। उसने अपना मुंह ढक रखा था कि कोई भी उसे पहचान ना पाए

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उसके पापा मम्मी की हिम्मत उसे मिल रही थी । जैसे ही बस कानपुर के लिए रवाना हुई वो मन ही मन भगवान और पापा को याद कर रही थीं ।

सुबह 4 बजे वह कानपुर बस स्टैंड पहुंच गई थी ।

आज वो बिल्कुल निडर थी। तुरंत उसने ऑटो ली और रेलवे स्टेशन पहुंच गई। आज जैसी हिम्मत अगर उसने पहले दिखाई होती तो ज़िन्दगी यू बर्बाद ना हो रही होती।

स्टेशन पर आकर उसने चैन कि सास ली।

आज मुंबई ट्रेन भी समय पर आकर रोशनी कि हिम्मत में उसका साथ दे रही थी।  अब वो एक नई ज़िन्दगी शुरू करने जा रही थी ।दूसरे दिन रोशनी मुंबई पहुंच गई ।

सबसे पहले वो अपने घर पहुंची । कुछ देर तो खड़ी रोती ही रही वो।

कुछ देर बाद शीतल आ गई।शीतल को देखते ही रोशनी उससे लिपट लिपट कर रोती रही। शीतल ने उसे बहुत सहारा दिया।

रोशनी तू अब उस पिंजड़े से उड़ चुकी है अब तू आजाद है अपनी ज़िंदगी फि र से शुरू कर ।भगवान ने तुझे एक और मौका दिया है। अब तुझे सब कुछ भूलकर आगे बढ़ना होगा ।

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अपने पैरो पर खड़ा होना होगा । अपने पापा का सपना पूरा कर । रोशनी अपने नाम का मान रख ।

और लड़कियों के लिए मिसाल बनाना है तुझे। शीतल ने उसे समझाते हुए कहा

तू सही कह रही है शीतल मै अपनी पढ़ाई पूरी करूं गी और आत्मनिर्भर बनूंगी । अब और नहीं रोना ।

रोशनी के पापा , मम्मी उसे आशीर्वाद दे रहे थे ।धन्यवाद दोस्तों 👋👋👋👋