साहब। मेरी बेटी को छोड़ दो॥

साहब। मेरी बेटी को छोड़ दो ॥

4 से 5 लोग उस अध मरी लड़की को उठाकर लाए और आंगन में रख दिया। वो अध मरी लड़की, जिसके शरीर पर नाममात्र के कपड़े थे। उस लड़की की मां अपनी बेटी की ऐसी हालत देखकर आंगन के

द्वार पर अपनी सुध बुध खो कर गिर पड़ी। And The Award For “Father of the Year” Goes to This Man! (18 pics) -  Izismile.com

उस लड़की का बाप हाथ में कुदाली लिए सबको हैरानी से देखता हुआ आंगन में कदम रखता है। सुन तो उसने भी लिया था

खेत में ही कि गांव के रसूखदारों के लड़कों ने उसकी बेटी के जिस्म पर शराब परोसी थी आज लेकिन यकीन नहीं कर पाया था।

 

आंगन में अस्त व्यस्त पड़ी अपनी बेटी को देख उसकी कुदाली उसके हाथ से छूट गई। चारों तरफ गांव के लोग इकट्ठा थे और उस लड़की को देख आपस में कुछ फुसफुसा रहे थे।

उस बूढ़े बाप ने इधर उधर कुछ खोजने के लिए देखा जिस से वो अपनी बेटी के शरीर को ढक सके।

जब कुछ ना दिखा तो झट उसने अपनी धोती उतारी और अपनी बेटी के क्षत विक्षत शरीर पर डाल दी। वो जोर जोर से चिल्लाने लगा “जाओ सब अपने घर, यहां क्या तमाशा देखने आए हो.??

जाओ… भागो यहां से… भागो…”

 

सबको जाने की कहता हुआ वो कांपते हाथों से मटके में से पानी निकाल कर अपनी बेटी के पास आया और उसे पिलाने लगा।

दर्द में बेसुध उस लड़की को जब उसके पिता ने स्पर्श किया तो वो चौंक गई। जब एक घिनौना स्पर्श आपने महसूस किया हो अपने शरीर पर तो कोई भी दूसरा स्पर्श एक पल को सिहरन दे देता है।

बमुश्किल आंखें खोलकर अपने पिता को देखा उसने तो उसकी वेदना फिर उसकी आंखों में उतर आई।

ये भी पढे : ले बेटे अपनी हवस बुझा ले॥ 

बाहर से पुलिस के सायरन की आवाज आई तो बूढ़ा चौंक गया। द्वार पर जाकर बाहर देखा तो पुलिस की एक गाड़ी और एम्बुलेंस उसी के घर की तरफ आ रहे थे।

झट वापस आकर उसने अपनी बेटी को उठाने को कोशिश की। वो इस हालत में नहीं थी कि उठ सके लेकिन किसी तरह उस बूढ़े बाप ने उसे उठाया और घर के अंदर लेे जाकर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

नहीं साहब ” गरीब का इंसाफ नहीं होता ?

पुलिस आंगन के द्वार पर पड़ी उस लड़की की मां पर एक नजर डालकर अंदर आ गई और घर का दरवाजा खटखटाने लगी “दरवाजा खोलो, उस लड़की को बाहर निकालो जिसका बलात्कार हुआ है।”

उस बूढ़े ने अंदर से कहा “नहीं खोलूंगा!!” पुलिस वालों ने फिर पूछा “क्यों” लेकिन बूढ़े ने जवाब नहीं दिया।

 

Indian State Police Force And Their Cars

 

देंगे और उसकी जांच भी हो जाएगी कि बलात्कार हुआ है या नहीं” पुलिस वालों ने कहा।

“नहीं करवानी कोई जांच। तुम लोग जाओ यहां से” अंदर से उस बूढ़े की दर्द भरी आवाज आई ।

 

तभी कोई बड़ा अफसर आया और बोला “क्या हुआ, क्या बात है? यहां क्यूं खड़े हो आप सब?” पुलिस वालों ने बताया कि बूढ़े ने लड़की को अंदर लेे लिया है और अब बाहर आने से मना कर रहा है।

उस अफसर ने उस बूढ़े का नाम पूछा सबसे।

उसने कहा “सुनो मंगरू, दरवाजा खोलो और अपनी बेटी को अस्पताल ले चलो वरना उसकी हालात बहुत खराब हो जाएगी, उसका बचना मुश्किल हो जाएगा।”

“अब भी कहां बची है”, “मंगरू ने उदास स्वर में कहा “नहीं बची वो, सब कुछ तो छीन लिया गया है उसका। उसकी अस्मत का, हमारी इज्जत का,

Rape Matte Poster, 12x18 inches Matte Print [HD Bright Art Print, Medium  Size, Rolled Poster] Paper Print - Art & Paintings posters in India - Buy  art, film, design, movie, music, nature

उसके सपनों का, सबका बलात्कार कर लिया गया है साहब… बलात्कार कर लिया  गया है।”

उस अफसर ने कहा “देखो मंगरू हम समझते हैं तुम्हे तकलीफ हुई है लेकिन बात मानो मेरी बाहर निकालो उसे।

उसका बयान लेंगे, उसके दोषियों को सजा दिलाएंगे।” मंगरू ने अंदर से ही कहा “किस किस को सजा दिलाएंगे साहब, कोई एक तो नहीं है मेरी बच्ची का दोषी।”

 

“इसके साथ ये घटियापन  करने वाले उन चार लड़कों के अलावा गांव का वो हर लड़का दोषी है जिसने मेरी जवान बेटी को खेत पर जाते हुए देख आह भरी होगी।

वो हर आदमी दोषी है जिसने इसे मुसीबत में देख मुंह फेर लिया होगा। वो सभी रसूखदार दोषी हैं जिन्होने अपने बच्चों को संस्कार नहीं दिए। किस किस को सजा देंगे साहब, किस किस को???”

 ये भी पढे: किन्नर का ” प्रेम 

उस अफसर ने कहा “सबको सजा मिलेगी लेकिन पहले अपनी बेटी को बाहर तो निकालो, उसका बयान लें।” बूढ़े ने कहा “नहीं निकालूंगा बाहर,

नहीं देगी वो कोई बयान। बयान के नाम पर जाने कितनी बार फिर उसका बलात्कार होगा।

 

अभी आप लेंगे बयान फिर बड़े साहब लेंगे, फिर कोर्ट में हर सुनवाई में उसका बयान लिया जाएगा। हर बार वो अपने ऊपर हुए जुल्म की दास्तां आपको सुनाएगी और एक बार फिर उस दर्दनाक पल को

महसूस करेगी। नहीं साहब… और दर्द नहीं दे सकता मैं उसे… और दर्द नहीं दे सकता।

 

उस अफसर ने कहा “देखो मंगरू बात को समझो…”  “आप मुझे समझ रहे हो साहब??” मंगरू ने रोते हुए जोर से कहा “समझ रहे हो क्या आप?

मैं क्या समझूं साहब?? मेरे सामने मेरी बिटिया लाश की तरह पड़ी है और मैं कुछ नहीं कर सकता उसके लिए… कुछ भी नहीं।”  “तुम उसे बाहर तो निकालो, उसे अस्पताल ले चलते हैं”, उस बड़े अफसर ने समझाते हुए कहा।

बूढ़े ने फिर दर्द भरी आवाज में कहा “नहीं ले जाना अस्पताल इसे साहब… नहीं ले जाना। वहां इसके ज़खम फिर कुरेदे जाएंगे।

इसके टांगों के बीच औजार डालकर वो जांचेंगे कि कुछ गलत हुआ है या नहीं हुआ।

 

Rape and two-finger test - Law Insider India

 

उन्हें बहता खून नजर नहीं आएगा साहब। उन्हें टूटी हड्डियों के चटकने की आवाज सुनाई नहीं देगी।

वो इसके इस बिना कपड़ों के शरीर की चमड़ी उतारकर उन दरिंदों के हाथों के निशान ढूंढेंगे। वो कैसे सहेगी ये सब। वो अब मेरी छुअन से चौंक जाती है, कैसे बर्दाश्त करेगी किसी और की छुअन को अपने

शरीर पर साहब…. कैसे..????”

 

उस अफसर ने कहा “देखो ये सब जांच जरूरी है, तभी तो पता लगेगा कि…” “कि उसका बलात्कार हुआ है”

उस बूढ़े बाप ने कहा “क्यों साहब, उन दरिंदों की कोई जांच नहीं होगी कि क्या वो किसीकी जिंदगी बर्बाद कर के आ रहे हैं? नहीं साहब नहीं होगी उनकी कोई जांच।

बल्कि मेरी बेटी को ही गलत साबित कर दिया जाएगा ये कहकर कि उसके साथ कोई दुष्कर्म ही नहीं हुआ।”

 

“मंगरू, एक बार जांच होगी, कार्यवाही शुरू होगी तभी तो सब कुछ सामने आयेगा ना” अफसर ने थोड़ा खीझते हुए कहा तो मंगरू ने भी जवाब दिया

“कुछ सामने नहीं आयेगा साहब… कुछ भी नहीं।  आपकी इन जांचों, इन कोर्ट कचहरी की सुनवाइयों के बीच में मेरी बेटी कब दम तो़ड देगी मैं जान ही नहीं पाऊंगा और फिर आप लोग आधी रात जाकर

उसका शरीर जला दोगे। मुझे तो उसकी राख तक नसीब नहीं होगी।”

Courthouse 1080P, 2K, 4K, 5K HD wallpapers free download | Wallpaper Flare

उस अफसर के पास कोई जवाब नहीं था लेकिन फिर भी उसने एक बार और कोशिश की बात करने की पर मंगरू अपनी जिद पर अड़ा रहा।

वो धीरे से बोला “मेरे जीते जी उसे हाथ लगा दिया लेकिन मेरे मरने के बाद उसे किसी को नहीं छूने दूंगा। मैं खुद संस्कार करूंगा अपनी बेटी का… खुद… अपने आप।”

बाहर अफसर योजना बना रहे थे कि उसे और समझाया जाए, गांव के कुछ लोगों से बात कर के मंगरू को समझाने के लिए कहा जाए।

 

इधर अंदर मंगरू ने केरोसिन का डिब्बा उठाया और अपनी बेटी के ऊपर और चारों ओर छिड़क दिया और खुद भी उस केरोसिन में स्नान कर लिया।

बाहर से फिर आवाज आई “मंगरू, दरवाजा खोल!” अंदर मंगरू ने ‘ओम नमः शिवाय’ कहकर माचिस की तीली केरोसिन से भीगी जमीन पर फेंक दी और भक्क करके सारी झोंपड़ी एक बार में दहक

उठी। आग का तेज भभका उठा और फूस की छत जल गई।

500+ Burning Pictures [HQ] | Download Free Images on Unsplash

सभी लोगों में भगदड़ मच गई। पुलिस वाले भी चौंककर पीछे हो गए।

पलक झपकते ही सारी झोंपड़ी धूं धूं कर जलने लगी। बाहर चारों तरफ चीखने चिल्लाने की आवाजें आने लगीं।

अंदर एक अधमरी लड़की और उसका बूढ़ा बाप जल रहे थे लेकिन एकदम सन्नाटा था। शायद जलने का दर्द उस दर्द से कम था जो अभी तक दोनों महसूस कर रहे थे।

जब तक कि पानी लाकर डाला जाता और आग बुझाई जाती सब जल चुका था। सब लोग खड़े तमाशा देखते रहे।

थोड़ी देर बाद वहां बस धुआं और राख बची थी। पुलिस भी लाचार कुछ कर नहीं पाई। इधर उधर फोन जाने लगे, मामले को दबा देने का जोर दिया जाने लगा।

गांव के रसूखदार परिवारों के लोग भी आने लगे आखिरी तमाशा देखने।

Places Of Asthi Visarjan - Mokshadhaam

 

आंगन के द्वार पर पड़ी वो तीसरी लाश उठी और मुट्ठी भर राख उठाकर बोली “लो, ये राख अपने अपने खेतों में डाल लो ताकि उनमें उपजने वाला अन्न दर्द और वेदना से भरा उगे

और जब तुम उसे खाओ

तो तुम्हें अहसास हो दूसरों की वेदना का और फिर तुम जन्म दो ऐसी पीढ़ी को जो संस्कारों से भरी हो और ऐसे घिनौने काम करने से पहले सौ बार सोचे।

लो… सब लोग लो… ये मुट्ठी भर राख सब लेे जाओ अपने खेत में… सब लेे जाओ…” ऐसा कहते हुए वो मुट्ठी में राख भर कर भागी नदी की तरफ और प्रवाहित कर दिया उस राख के साथ खुद को। तो पाठकों मंगरु ने सही किया या गलत आप हमें कमेन्ट जरूर करे,  धन्यवाद दोस्तों 🙏🙏

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *