जेठ जी मुझे उस हालत में देख लिया॥ मैं तो शर्म से … ?

क्या मेरा वहम  हैं ,, जो जेठ जी,, ?

हां अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। दरवाजे की झिर्री से आंख सटा कर उस ने ध्यान से देखा तो जेठजी को अपनी ओर देखते उस के होश फाख्ता हो गए।

अगले ही पल उस ने थोड़ी सी ओट ले कर दरवाजे को झटके से बंद किया। मगर थोड़ी देर बाद ही चर्ररर…की आवाज के साथ चरमराते दरवाजे की झिर्री फिर जस की तस हो गई। तनिक

ओट में जल्दी से कपड़े पहन नेहा बाथरूम से बाहर निकली।सामने वाले कमरे में जेठजी जा चुके थे।

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नेहा का पूरा शरीर थर्रा रहा था। क्या उस ने जो देखा वह सच है। क्या जेठजी इतने निर्लज्ज भी हो सकते हैं। अपने छोटे भाई की पत्नी को नहाते हुए देखना,

छि, उन्होंने तो मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ लीं…नेहा सोचती जा रही थी।कितनी बार उस ने मयंक से इस दरवाजे को ठीक करवाने के लिए कहा था। लेकिन हर बार बात आई गई हो गई थी। एक तो पुराना दरवाजा,

 

उस पर टूटी हुई कुंडी, बारबार कस कर लगाने के बाद भी अपनेआप खुल जाया करती थी।

उस ने कभी सोचा भी नहीं था कि उस झिर्री से उसे कोई इस तरह देखने का यत्न कर सकता है।

 

पहले भी जेठजी की कुछ हरकतें उसे नागवार लगती थीं। जैसे पैर छूने पर आशीर्वाद देने के बहाने अजीब तरह से उस की पीठ पर हाथ फिराना,

बेशर्मों की तरह कई बार उस के सामने पैंट पहनते हुए उस की जिप लगाना।

 

डेढ़ साल के नन्हें भतीजे को उस की गोद से लेते समय उस के हाथों को जबरन छूना और उसे अजीब सी निगाहों से देखना आदि।

 

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नई नई शादी की सकुचाइट में वह मयंक को भी कुछ नहीं बता पाती। कई बार उसे खुद पर संशय होता कि क्या उस का शक सही है या फिर यह सब सिर्फ वहम है।

 

जल्दबाजी में कोई निर्णय कर वह किसी गलत नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहती थी। क्योंकि यह एक बहुत ही करीबी रिश्ते पर प्रश्नचिह्न खड़ा करने जैसा था।

 

लेकिन आज की घटना ने उसे फिर से सोचने पर विवश कर दिया।घर के आंगन से सटा एक कोने में बना यह कमरा यों तो अनाज की कोठी, भारी संदूक व पुराने कूलर आदि रखने के काम आता था।

 

परंतु रेलवे में पदस्थ सरकारी कर्मचारी उस के जेठ अपनी नाइट ड्यूटी के बाद शांति से सोने के लिए अकसर उक्त कमरे का इस्तेमाल किया करते थे।

 

हालांकि घर में 4 से 5 कमरे और थे। लेकिन जेठजी इसी कमरे में पड़े एक पुराने दीवान पर बिस्तर लगा कर जबतब सो जाया करते थे।

 

इस कमरे से आंगन में बने बाथरूम का दरवाजा स्पष्ट दिखाई देता था। आज सुबह भी ड्यूटी से आए जेठजी इसी कमरे में सो गए थे।

नहीं -नहीं मैं ये सब नहीं बता सकती ,,नहीं तो मेरा .. ॥

उन की बदनीयती से अनभिज्ञ नेहा सुबह के सभी कामों को निबटा कर बाथरूम में नहाने चली आई थी।नेहा के मन में भारी उथलपुथल मची थी।

क्या इस बात की जानकारी उसे मयंक को देना चाहिए या अपनी जेठानी माला से इस बाबत चर्चा कर देखना चाहिए।

 

लेकिन अगर किसी ने उस की बात पर विश्वास नहीं किया तो…मयंक तो अपने बड़े भाई को आदर्श मानता है और भाभी…वे कितनी भली महिला हैं। अगर उन्होंने उस की बात पर विश्वास कर भी लिया।

तो बेचारी यह जान कर कितनी दुखी हो जाएंगी। दोनों बच्चे तो अभी कितने छोटे हैं। नहीं नहीं, यह बात वह घर में किसी को नहीं बता सकती।

 

अच्छा भला घर का माहौल खराब हो जाएगा। वैसे भी, सालछह महीने में मयंक की नौकरी पक्की होते ही वह यहां से दिल्ली उस के पास चली जाएगी।

हां, इस बीच अगर जेठजी ने दोबारा कोई ऐसी हरकत दोहराई तो वह उन्हें मुंहतोड़ जवाब देगी।यह सोचते हुए नेहा अपने काम पर लग गई

 

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उत्तर प्रदेश के कानपुर में 2 वर्षों पहले ब्याह कर आई एमए पास नेहा बहुत समझदार व परिपक्व विचारों की लड़की थी।

उस के पति मयंक दिल्ली में एक कंपनी में बतौर अकाउंट्स ट्रेनी काम करते थे। अभी फिलहाल कम सैलरी व नौकरी पक्की न होने के कारण नेहा ससुराल में ही रह रही थी..

 

कुछ पुराना पर खुलाखुला बड़ा सा घर, किसी पुरानी हवेली की याद दिलाता सा लगता था।

उस में जेठजेठानी और उन के 2 छोटे बच्चे, यही नेहा की ससुराल थी। यहां उसे वैसे कोई तकलीफ नहीं थी।

 

बस, अपने जेठ का दोगलापन नेहा को जरा खलता था। सब के सामने प्यार से बेटाबेटा कहने वाले जेठजी जरा सी ओट मिलते ही उस के सामने कुछ अधिक ही खुलने का प्रयास करने लगते।

जिस से वह बड़ी ही असहज महसूस करती।

 

स्त्रीसुलभ गुण होने के नाते अपनी देह पर पड़ती जेठजी की नजरों में छिपी कामुकता को उस की अंतर्दृष्टि जल्द ही भांप गई थी।

एहतियातन जेठजी से सदा ही वह एक आवश्यक दूरी बनाए रखती थी।होली आने को थी।

 

माला और बच्चों के साथ मस्ती और खुशियां बिखेरती नेहा जेठजी के सामने आते ही एकदम सावधान हो जाती।

उसे होली पर मयंक के घर आने का बेसब्री से इंतजार था। पिछले साल होली के वक्त वह भोपाल अपने मायके में थी।सो, मयंक के साथ उस की यह पहली होली थी. होली के 2 दिनों पहले मयंक के आ जाने से नेहा की खुशी दोगुनी हो गई।

 

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पति को रंगने के लिए उस ने बच्चों के साथ मिल कर बड़े जतन से एक योजना बनाई। जिस की भनक भी मयंक को नहीं पड़ने पाई।

होली वाले दिन महल्ले में सुबह से ही बच्चों की धमाचौकड़ी शुरू हो गई थी। नेहा भी सुबह जल्दी उठ कर भाभी के साथ घर के कामों में हाथ बंटाने लगी।

 

जल्दीजल्दी हाथ चला नेहा, 10 से 11 बजे से महल्ले की औरतें धावा बोल देंगी। कम से कम खाना बन जाएगा तो खानेपीने की चिंता नहीं रहेगी।

जेठानी की बात सुन नेहा दोगुनी फुरती से काम में लग गई।

 

थोड़ी ही देर में पूड़ी, कचौड़ी, दही वाले आलू, मीठी सेवइयां और अरवी की सूखी सब्जी बना कर दोनों देवरानीजेठानी फारिग हो गईं।

भाभी, मैं जरा इन को देख कर आती हूं, उठे या नहीं.।हां, जा, पर जरा जल्दी करना,’’ माला मुसकराते हुए बोली. कमरे में घुस कर नेहा ने सो रहे मयंक के चेहरे की खूब गत बनाई।

 

और मजे से चौके में आ कर अपना बचा हुआ काम निबटाने लगी। इधर, मयंक की नींद खुलने पर सभी उस का चेहरा देख कर हंसतेहंसते लोटपोट हो गए।

 

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हैरान मयंक ने बरामदे में लगे कांच में अपनी लिपीपुती शक्ल देखी तो नेहा की शरारत समझ गया। भाभी, नेहा कहां है?’

भई, तुम्हारी बीवी है। तुम जानो. मुझे तो सुबह से नजर नहीं आई। भाभी ने हंसते हुए जवाब दिया।बताता हूं उसे, जरा मिलने दो. अभी तो मुझे अंदर जाना है।हाथ से फ्रैश होने का इशारा करते हुए वह टौयलेट में जा घुसा। इधर, नेहा भाभी के कमरे में जा छिपी थी।

 

फ्रैश हो कर मयंक ने ब्रश किया और होली खेलने के लिए बढि़या सफेद कुरतापजामा पहना. ‘‘भाभी, नाश्ते में क्या बनाया है।

बहुत जोरों की भूख लगी है। फिर दोस्तों के यहां होली खेलने भी निकलना है। मयंक ने भाभी से कहा, इस बीच उस की निगाहें नेहा को लगातार ढूंढ़ रही थीं। मयंक ने नाश्ता खत्म ही किया था कि भतीजी खुशी ने उस के कान में कुछ फुसफुसाया.

 

अच्छा…मयंक उस की उंगली थामे उस की बताई जगह पर आंगन में आ खड़ा हुआ। बताओ, कहां है चाची? पूछने पर ‘‘एक मिनट चाचा कहती हुई खुशी उस का हाथ छोड़ कर फुरती से दूर भाग गई।

इतने में पहले से ही छत पर खड़ी नेहा ने रंग से भरी पूरी की पूरी बालटी मयंक पर उड़ेल दी। ऊपर से अचानक होती रंगों की बरसात में बेचारा मयंक पूरी तरह नहा गया।

 

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उस की हालत देख कर एक बार फिर पूरा घर ठहाकों से गूंज उठा। थोड़ी ही देर पहले पहना गया सफेद कुरतापजामा अब गाढ़े गुलाबी रंग में तबदील हो चुका था।

आप कैसे इंसान हो ,, जो अपनी भाई की पत्नी को .. ?

ठहरो, अभी बताता हूं तुम्हें